चौंसठ योगिनी मंदिर मितावली मुरैना मध्य प्रदेश | Chausath Yogini Temple Mitawali Morena Madhya Pradesh | 360 Degree VR Video

Posted by Dekho 360 on Friday, August 23, 2019

नवल कान्त सिन्हा
मितावली (मुरैना)। संसद भवन की इमारत तो आप पहचानते ही होंगे। अगर आपसे यह सवाल पूछा जाए कि संसद की डिजाइन किसने तैयार की थी। तो आपके ज़ेहन में लुटियंस का नाम आ जाएगा। आधिकारिक रूप से ये दर्ज भी है कि संसद भवन की डिजाइन को ब्रिटिश आर्किटेक्ट एड्विन लुटयेंस और सर हर्बर्ट बेकर ने तैयार किया था। लेकिन हम जिस मंदिर पर आपसे चर्चा करने जा रहे हैं तो उसकी तस्वीरों और वीडियो को देखकर आपको लगेगा कि यह सच नहीं है। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के ग्राम पंचायत मितावली के एक चौंसठ योगिनी मंदिर है। वीराने में उपेक्षित से पड़े हुए इस मंदिर के ढाँचे को देखकर आपको संसद भवन की याद आ जायेगी।

भारत में 5 चौसठ योगिनी मदिरों के लिखित साक्ष्य उपलब्ध हैं, इनमे से दो ओडिशा और तीन मध्य प्रदेश में हैं। लेकिन हम जिस मंदिर की चर्चा कर रहे हैं, वह वर्तमान में मौजूद सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। चौसठ योगिनी मंदिर ग्वालियर से 40 किलोमीटर दूर मुरैना जिले के पडावली के पास मितावली गाँव में है। 1323 ईस्वी पूर्व के एक शिलालेख के अनुसार (विक्रम संवत 1383) मंदिर कच्छप राजा देवपाल द्वारा बनाया गया था।

कहा जाता है कि मंदिर सूर्य के गोचर के आधार पर ज्योतिष और गणित में शिक्षा प्रदान करने का स्थान था। चौसठ योगिनी मंदिर को एकट्टसो या इकेंतेश्मवर महादेव मंदिर भी कहा जाता है। यह मंदिर लगभग सौ फीट ऊँची एक अलग पहाड़ी के ऊपर स्थित है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने मंदिर को 1951 के  एक अधिनियम (संख्या LXXI, dt।28 / 11/1951) के तहत प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक घोषित किया है। यह गोलाकार मंदिर चौंसठ योगिनियों को समर्पित है। यह बाहरी रूप से 170 फीट की त्रिज्या के साथ गोलाकार है और इसके आंतरिक भाग के भीतर 64 छोटे कक्ष हैं। मुख्य केंद्रीय मंदिर में स्लैब के आवरण हैं, जिसमें एक बड़े भूमिगत भंडारण के लिए वर्षा जल को संचित करने के लिए छिद्र हैं। छत से पाइप लाइन बारिश के पानी को स्टोरेज तक ले जाती है। एक ज़माने में ये मंदिर तंत्र-मंत्र के लिए बहुत प्रसिद्ध था, इसलिए इस मंदिर को तांत्रिक यूनिवर्सिटी भी कहा जाता था। यहां देश-विदेश से लाखों तांत्रिक तंत्र-मंत्र जानने आते थे।

मंदिर की संरचना इस प्रकार है कि सैकड़ों साल में कई भूकम्प के झटके झेलने और उपेक्षित रहने के बावजूद यह  मंदिर सुरक्षित है । यह भूकंपीय क्षेत्र तीन में है। मंदिर परिसर में पहुँचने के लिए पहले थोड़ी चढ़ाई और कुछ सीढ़ियां चढ़नी होती है। वृत्तीय आधार पर बने इस मंदिर में 64 कमरे हैं। हर कमरे में एक-एक शिवलिंग बना हुआ है। मंदिर के बीच में एक खुला हुआ मण्डप है, जिसमें एक विशाल शिवलिंग था। हर कमरे में शिवलिंग के साथ देवी योगिनी की मूर्ति साथ थीं। लेकिन कुछ मूर्तियां चोरी होने के बाद शेष मूर्तियों को संग्राहलय में रख दिया गया है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि ये मंदिर आज भी शिव की तंत्र साधना के कवच से ढका हुआ है। यहां रात में रुकने की इजाजत नहीं है। यहाँ तक कि कोई पक्षी भी यहाँ रात को नज़र नहीं आता। तंत्र साधना के लिए मशहूर इस मंदिर में शिव की योगनियों को जागृत किया जाता था। ये सभी चौसठ योगिनी माता आदिशक्ति काली का अवतार माने जाती हैं।
कहा जाता है कि घोर नामक दैत्य के साथ युद्ध करते हुए मां काली ने यह अवतार लिए थे। इन देवियों में दस महाविघाएं और सिद्ध विघाओं की भी गणना की जाती है। यह भी माना जाता है कि ये सभी माता पर्वती की सखियां हैं। भारत में आठ या 9 प्रमुख चौसठ योगिनी मंदिर का उल्लेख मिलता है। समस्त योगिनियां अलौकिक शक्तिओं से सम्पन्न हैं तथा इंद्रजाल जादू वशीकरण मारण स्तंभन इत्यादि कर्म इन्हीं की कृपा द्वारा ही सफल हो पाते हैं। प्रमुख रूप से आठ योगिनियों के नाम इस प्रकार हैं-
1- सुर-सुंदरी योगिनी
2- मनोहरा योगिनी
3- कनकवती योगिनी
4- कामेश्वरी योगिनी
5- रति सुंदरी योगिनी
6- पद्मिनी योगिनी
7- नतिनी योगिनी
8- मधुमती योगिनी
इतिहासकार इस मंदिर को गुर्जर और कछप कालीन मानते हैं। कुछ इतिहासकारों का कहना है कि करीब सात सौ साल पहले, 1323 ई. में राजा देवपाल ने तंत्र साधना के शिक्षा केन्द्र के रूप में चौंसठ योगिनी मंदिर का निर्माण कराया होगा।
योगाभ्यास करने वाली स्त्री को योगिनी या योगिन कहा जाता है। यह भी माना जाता है कि ये सभी माता पर्वती की सखियां हैं। इन चौसठ देवियों में से दस महाविद्याएं और सिद्ध विद्याओं की भी गणना की जाती है।

Posted by Dekho 360 on Friday, August 23, 2019

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