मुरुदेश्वर शिव मंदिर भटकल उत्तर कन्नड़ कर्नाटक | विश्व की ऊंची शिव प्रतिमाओं में से एक | Murdeshwar Shiva Temple Bhatkala Uttara Kannada Karnataka

आइये आपको उस मंदिर के दर्शन कराते हैं तो रामायण काल का माना जाता है और यहाँ स्थापित भगवान् शंकर की मूर्ति दुनिया की सबसे बड़ी मूर्तियों में से एक है। मुरुदेश्वर मंदिर अरब सागर के तट पर कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले की भटकल तहसील में स्थित है। समुद्र तट होने पर स्थित इस मंदिर का नज़ारा अद्भुद है। इतने मनमोहक नज़ारे में स्थापित इस मंदिर का आस्था भी बहुत है। इस मंदिर परिसर में स्थापित भगवान् शंकर की मूर्ति को दुनिया की सबसे बड़ी मूर्तियों में से एक माना जाता है। भगवान् शिव की विशाल प्रतिमाओं में से एक अन्य नेपाल में कैलाशनाथ महादेव प्रतिमा है। यह प्रतिमा काठमांडू से 20 किलोमीटर दूर भक्तापुर और कावरेपालन चौंक जिलों की सीमा पर सांगा में स्थित है। एक अन्य विशालकाय 351 फुट ऊंची शिव प्रतिमा राजस्थान के नाथद्वारा में गणेशटेकड़ी में नवनिर्मित है।
मुरुदेश्वर मंदिर के बारे में कथाओं के अनुसार, रावण जब शिवजी से अमरता का वरदान पाने के लिए तपस्या कर रहा था, तब शिवजी ने प्रसन्न होकर रावण को एक शिवलिंग दिया, जिसे आत्मलिंग कहा जाता है। इस आत्मलिंग के संबंध में शिवजी ने रावण से कहा था कि इस आत्मलिंग को लंका ले जाकर स्थापित करना, लेकिन एक बात का ध्यान रखना कि इसे जिस जगह पर रख दिया जाएगा, यह वहीं स्थापित हो जाएगा। अत: यदि तुम अमर होना चाहते हो तो इस लिंग को लंका ले जा कर ही स्थापित करना।
रावण इस आत्मलिंग को लेकर चल दिया। सभी देवता यह नहीं चाहते थे कि रावण अमर हो जाए इसलिए भगवान विष्णु ने छल करते हुए वह शिवलिंग रास्ते में ही रखवा दिया। जब रावण को विष्णु का छल समझ आया तो वह क्रोधित हो गया और इस आत्मलिंग को नष्ट करने का प्रयास किया। तभी इस लिंग पर ढका हुआ एक वस्त्र उड़कर मुरुदेश्वर क्षेत्र में आ गया था। इसी दिव्य वस्त्र के कारण यह तीर्थ क्षेत्र माना जाने लगा है।
मुरुदेश्वर मंदिर में भगवान शिव की विशाल मूर्ति स्थापित हैं, जिसकी ऊंचाई लगभग 123 फीट है। यह मूर्ति भगवान शिव की दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची मूर्ति मानी जाती है। इस मूर्ति को इस ढंग से बनवाया गया है कि इस पर दिनभर सूर्य की किरणें पड़ती रहती हैं और यह चमकती रहती है। यह मंदिर एक पहाड़ी पर बना हुआ है और इसके तीन ओर अरब सागर है। पहाड़, हरियाली और नदियों की वजह से यह क्षेत्र बहुत ही सुंदर और आकर्षक लगता है। मंदिर में भगवान शिव का आत्मलिंग भी स्थापित है। मंदिर के मुख्य द्वार पर दो हाथियों की मूर्तियां स्थापित हैं। वैसे तो इस मंदिर में वर्षभर दर्शन होते हैं लेकिन घूमने के लिहाज़ से इस इलाके में नवम्बर से लेकर फरवरी तक का मौसम उपयुक्त होता है.

दर्शन और पूजा का समय-
सुबह –
3:00 AM to 1.00 PM
शाम –
3:00 PM to 8:00 PM

Address:
Murudeshwar Temple
Main Road
Murdeshwar Bhatkal Taluk,
Murdeshwar, Karnataka 581350

पहुँचने के लिए-
सड़क मार्ग- बंगलुरु 455 किलोमीटर, मंगलोर 165 किलोमीटर
निकटतम रेलवे स्टेशन –
मुरुदेश्वर स्टेशन पर कोंकड़ रेलवे मुंबई और मंगलोर से आने वाली कुछ ट्रेनें रुकती हैं. वैसे भटकल स्टेशन यहाँ पहुँचने के लिए उपयुक्त स्टेशन है.
निकटतम एयरपोर्ट –
मंगलोर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट 165 किलोमीटर दूर है. हुबली और पणजी एयरपोर्ट अन्य दो विकल्प हैं.
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